गाजा: मशहूर राजनीतिक विश्लेषक अब्दुल बारी अतवान ने इस्राईल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइज़ेनकोट की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा है कि दोनों की विचारधारा और फिलिस्तीन को लेकर उनकी नीतियों में कोई खास अंतर नहीं है। उन्होंने दोनों को जायोनीवाद और आतंकवाद के एक ही सिक्के के दो पहलू बताया।
अतवान ने इस्राईली संसद (नेसेट) के अरब सांसदों द्वारा आइज़ेनकोट को समर्थन दिए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आइज़ेनकोट ने इस्राईली सरकार में शामिल होने के लिए चार शर्तें रखी हैं, इसके बावजूद अरब सांसद उनका समर्थन कर रहे हैं।
अतवान के मुताबिक, इस्राईल अरब मतदाताओं के वोटों का इस्तेमाल तो करता है, लेकिन उन्हें सरकार में भागीदारी और फैसले लेने के अधिकार से दूर रखता है। उन्होंने कहा कि अरब सांसदों को केवल दूसरों के फैसलों पर मुहर लगाने तक सीमित किया जा रहा है।
उन्होंने याद दिलाया कि आइज़ेनकोट ज़ायोनी सेना के प्रमुख और नेतन्याहू की युद्ध कैबिनेट के सदस्य रह चुके हैं। अतवान ने कहा कि इस कैबिनेट ने गाजा में नरसंहार और फिलिस्तीनियों के विस्थापन की कार्रवाई को अंजाम दिया। उनके अनुसार, आइज़ेनकोट की मौजूदगी वाली संसद में पश्चिमी तट को इजरायल में मिलाने और अवैध बस्तियों के निवासियों को हथियार देने के फैसले भी हुए।
अतवान ने कहा कि नेतन्याहू और आइज़ेनकोट में से किसी एक को बेहतर मानकर समर्थन देना गलत है। उन्होंने आइज़ेनकोट और उनके गठबंधन का समर्थन करने को फिलिस्तीनी प्रतिरोध और शहीदों के बलिदान का अपमान बताया।
उन्होंने कहा, "हमारा दुश्मन केवल नेतन्याहू नहीं, बल्कि हर वह जायोनी है जो हमारी जमीन पर कब्जा करके हमारी राष्ट्रीय पहचान मिटाना चाहता है।"
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